अंशुमान कृत प्रेम, अंक और विवाह - Anshuman'n Numerology
October 27, 2021

Anshuman'n Numerology

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अंशुमान कृत प्रेम, अंक और विवाह

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Anshuman's Love Number and Marriage

निराकार , गुणाकार , ब्रह्म स्वरुप शून्य प्रेरक रुप में स्वतः विस्तृत हो कर , अनेकों प्रकार से संप्रेषित होता हुआ इस सृष्टि का कारण बनता है । ‘ नाद ‘ ब्रह्म की क्रियाशील पद्धति का प्रारंभिक स्तर है । सृष्टि के रहस्य मनुष्य की विचारशीलता से प्रकट होते हुये ‘ शब्द ‘ के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों तक भी जा पहुंचे । स्वयं में अपरिभाषित शून्य की संख्याओं को सृजित करने की क्षमता अद्भुत है । वृत प्रकारान्तर से शून्य , जो विभिन्न इकाइयों , कोणिक आकृतियों में रुपान्तरित और विभक्त होता हुआ अन्य संख्याओं के लिये रेखा गणितीय आधार बन गया । संख्यायें जिनके संयोग से ही शून्य का व्यक्तित्व और उसकी शक्ति प्रकट होते हैं ।

भाषा प्रतीक बोधक है और संख्या सांकेतिक । ‘ संख्या ‘ जो कि ‘ शब्द ‘ में लिखी जा सकती है , किन्तु संख्या के संकेत जितने बड़े प्रभाव क्षेत्र को मात्र ‘ शब्द ‘ व्यक्त नहीं कर सकता है । यह संकेतात्मकता ही इन संख्याओं की शक्ति है । संख्या रुप में एक , अनेक व अनन्त ब्रह्म के अपरिमित विराट स्वरूप को दर्शाते ये अंक और इनकी विभिन्न आवृतियां ही , इनके विभिन्न क्षेत्रों के प्रभाव व्यक्त करते हैं । अंको की इसी क्रियाशीलता को समझने अर्थात् जीवन के रहस्यों और अज्ञात भविष्य को ज्ञात करने का उपक्रम ही अंक ज्योतिष है । रंगों और रेखाओं के भी अपने – अपने क्षेत्रों के व्यक्तित्व हैं । ‘ रमल शास्त्र ‘ जो कि अंको पर ही आधारित है । नक्षत्र स्वरूप नवग्रहों के प्रतिनिधि इन अंको में आश्चर्य समाया हुआ है ।

© अंशुसप्त्तुरंग

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